तो क्या पैराशूट प्रत्याशियों पर दांव लगायेंगे राजनीतिक दल
सै. हसनैन कमर "दीपू"
जौनपुर।2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा, सपा, कांग्रेस व बसपा पार्टी में पैराशूट नेताओं की अचानक से आने से चुनावी पारा चढ़ गया था लेकिन जब इन राजनीतिक दलों से नेताओं को उनकी पार्टियों ने विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया तो वे फिर लापता हो गये लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव की सुगबुगाहट शुरू होते ही एक बार फिर सभी पार्टियों में पैराशूट नेताओं की होर्डिंग पोस्टर नगर के चौराहे गली कूचों में दिखाई पड़ने लगे।
खासतौर पर सत्तारूढ़ दल भाजपा में जैसे बाढ़ सी आ गई है जिनका राजनीति से कोई सरोकार नहीं था वे भी अचानक से समाजसेवी व भाजपा नेता बनकर बड़े बड़े चौराहों पर पोस्टरों व बैनरों में दिखाई पड़ने लगे हैं। ऐसे में जनता के मन मे अब सवाल उठने लगा कि आखिर अब तक ये जनता की सेवा करने में पीछे क्यूं थे। देखा जाये तो जिले की नौ नगर पंचायत व तीन नगरपालिका परिषद अध्यक्ष पद पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं। बात अगर नगर की करी जाये तो जिले के सर का ताज होने के
नाते इस सीट पर ज्यादा लोग अपनी दावेदारी पोस्टर बैनर व होडिंग के माध्यम से जुट गये हैं हलांकि सीट आरक्षण में सामान्य होगी या फिरओबीसी या एससी इसका संशय बना हुआ है पर पैराशूट प्रत्याशी अभी से अपनी प्रबल दावेदारी ठोंकते हुए लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने में जुट गये हैं इस बारे में भाजपा जिलाध्यक्ष पुष्पराज सिंह का कहना है कि निकाय चुनाव को देखते हुए पार्टी में आवेदन बड़ी संख्या में आने शुरू हो चुके हैं पर टिकट किसको मिलेगा यह निर्णय संगठन उनके कार्यों को देखते हुए करता चला आ रहा है। ऐसे में पार्टी का निर्णय ही अंतिम व सर्वोप्परी होगा। समाजवादी पार्टी मे भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। इस सीट पर जहां प्रबल दावेदार के रूप में डॉ. चित्रलेखा सिंह जुटी हुई हैं तो वहीं तेज बहादुर मौर्य पप्पू, जगदीश मौर्य गप्पू, पूनम मौर्य, इरशाद मंसूरी, शकील अहमद, अनवारूलहक गुड्डू, श्रवण जायसवाल जैसे अनेक बड़े नाम भी अध्यक्ष पद की सीट पर अपना दांव लगाने के इंतजार में बैठे हैं। जिलाध्यक्ष लालबहादुर यादव का कहना है कि पार्टी अपना अधिकृत प्रत्याशी राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्णय के बाद ही तय करेगी। पिछले चुनाव में समाजवादी पार्टी ने नगर सीट पर पूनम मौर्या पर दांव लगाया था वे दूसरे नंबर पर थीं। वहीं अगर बात की जाये कांग्रेस की तो जिलाध्यक्ष फैसल हसन तबरेज का कहना है कि आवेदन करने वालों की लिस्ट धीरे धीरे बढ़ती जा रही है। पार्टी ने स्थानीय निकाय चुनाव को मजबूती से लड़ने का निर्णय लिया है और जल्द ही चुनाव के बिगुल बजते ही परिणाम सामने आ जायेगें। इन सभी लोगों की निगाहें सिर्फ दिनेश टंडन के परिवार पर टिकी है क्योंकि दो दशक से उनका इस सीट पर कब्जा कायम है। बसपा की हाथी पर सवार दिनेश टंडन व उनकी पत्नी माया टंडन अभी तक अन्य राजनीतिक दलों को धूल चटाकर जनता का समर्थन प्राप्त कर चुकी हैं लेकिन इस बार के चुनाव में इतना आसान नजर नहीं आ रहा है जितना पूर्व के चुनाव में दिखा था। यदि देखा जाये तो कई बड़े नाम वाले नेता दूसरे राजनीतिक दल का दामन भी थाम सकते हैं तो टिकट न मिलने पर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपनी ताल ठोंक सकते हैं। ऐसे में इन सभी राजनीतिक दलों में पैराशूट प्रत्याशियों की भरमार भरी पड़ी है।
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