नगर कोतवाली के पास स्थित मीरमस्त मोहल्ले के निवासी आकील जौनपुर देश ही नही विदेशों में ऊर्दू अदब के शायरो में अपनी एक अलग पहचान थे।
"उनका चर्चित नज्म "वफा में बेहयाही ढूंढता है,गंगा जल में कायी ढूंढता है" "थका हारा मुसाफिर घर पहुंचकर बस अपनी चारपाई ढूंढता ने उन्हे पूरी दुनियां में अलग पहचान दिलायी।
शायर मजहर ने बताया कि आकील जौनपुर के वालिद सफीक जौनपुर आजादी के समय सैकड़ो नज्म लिखा था। ये नज्में आजादी के दीवानों में जोश और जज्बा पैदा करता था। अपने वालिद की तरह आकील साहब देश भक्ति से ओतप्रोत नज्में लिखते और पढ़ते रहे है। आज उनके दुनियां से जाने जिले को ही नही बल्की देश को बड़ी क्षति हुई है जिसका भरपाई होना मुश्किल ही नही ना मुमकीन है।
सभासद साजिद अलीम ने बताया कि आकील जौनपुरी साहब को हार्ट व शुगर की विमारी थी। आज भोर में उनकी तबियत अचानक विगड़ गयी। उन्हे परिवार वाले डा़ बीएस उपाध्याय के पास ले गये लेकिन उन्होने कोरोना के भय से इलाज करना तो दूर की बात देखा तक नही मजबूरी में उन्हे जिला अस्पताल ले जाया गया जहां पर डाक्टरो ने उन्हे बीएचयू रेफर कर दिया। बीएचयू के डाक्टरो ने मृत घोषित कर दिया । उन्होने साफ कहा कि यदि जौनपुर के डाक्टरो ने उनका इलाज किया होता तो आज हम लोगो को इतनी बड़ी क्षति न होती।
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