Jaunpur: उत्तर प्रदेश में जब योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में सरकार भाजपा की बनी थी तो उन्होंने शपथ लेने के बाद सबसे पहले भ्रष्टाचार को खत्म करने का दावा किया था। उसकी शुरुआत उन्होंने लखनऊ के गोमती रिवर फ्रंट की जांच से किया तो ना सिर्फ प्रदेश में बल्कि पूरे देश में भाजपा सरकार का मैसेज साफ हो गया था। पर जैसे-जैसे साल गुजरता गया ब्यूरोक्रेसी, राजनेता, पत्रकार का गठजोड़ प्रदेश में खुलकर सामने आने लगा। एक के बाद एक भ्रष्टाचार के बड़े आरोप विपक्ष लगाते रहे, हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पुलिस ने उसका समय समय पर खुलासा तो किया पर भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में नाकाम साबित होती नजर आ रही हैं ।शिक्षक भर्ती घोटाला रहा हो या फिर विधानसभा के सचिवालय में पशुधन मंत्रालय की नाक के नीचे करोड़ो रुपए के टेंडर दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला रहा हो। एसटीएफ ने इन खुलासों को करके दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। अगर बात की जाए शीराज़ -ए -हिंद की सरजमी जौनपुर की तो इन 3 साल के कार्यकाल में जिले में अपराध का ग्राफ हमेशा चढ़ा रहा। कई एसपी आते रहे और जाते रहे पर अपराध को पूरी तरह नियंत्रण करने में कामयाब नहीं हो सके ।वर्तमान में तैनात जिले के पुलिस अधीक्षक अशोक कुमार ने आते ही यह दावा किया था कि अपराध को नियंत्रण करेंगे पर वह भी इसमें नाकाम साबित होते नजर आ रहे हैं ।उसकी वजह साफ है कि इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टरों की मनचाही थानों पर तैनाती और सालों तक थानों पर अंगद की पैर की तरह जमे रहने के कारण उनके ऊपर ना सिर्फ जनता ,राजनेता, व्यापारी व पत्रकारों द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे, बल्कि कानून व्यवस्था मैं पूरी तरह फेल होने के दावे भी होता रहा। हालांकि कुछ ऐसे थाना अध्यक्ष भी हैं जिन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर कई बड़े खुलासे भी किए हैं। लेकिन बात वहीं आकर समाप्त हो जाती है कि जब कोई थाना अध्यक्ष लापरवाही के कारण निलंबित या लाइन हाजिर होता है तो पीछे के दरवाजे से कुछ दिनों बाद उसे अच्छे थाने पर पुनः तैनाती मिल जाती है ।यह साफ दर्शाता है कि पुलिस पत्रकार व राजनेताओं का गठजोड़ आज भी जारी है जो कहीं न कहीं पुलिस के आला कमान को यह सब करने पर मजबूर कर देता है। जिले के दो बहुचर्चित थानों की अगर बात की जाए तो शाहगंज कोतवाली में करीब 2 वर्षों से तैनात इंस्पेक्टर जेपी सिंह के ट्रांसफर की खबर गुरुवार की रात जब शाहगंज के पत्रकारों ,राजनेताओं व्यपारी व जनता को मिली तो वह मानो ऐसा खुश हुए जैसे उनके यहां की बला चलकर जौनपुर शहर की तरफ चली गई हो।वही लाइन बाजार थाना अध्यक्ष दिनेश कुमार पांडे 10 दिन पूर्व एक फोटो स्टेट की दुकानदार विनोद कुमार सिंह से मात्र पर के विवाद को लेकर जिस तरह चर्चा में रहे और पूरे परिवार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस की वर्दी का रौब दिखाया गया था उससे आम जनमानस भय व आतंक का माहौल बन गया था। हालात इतने खराब हो गए थे कि भाजपा के जफराबाद के विधायक डॉ हरेन्द्र प्रताप सिंह को घंटों थानों पर बैठकर पंचायत करनी पड़ी और एसपी से लेकर आईजी, डीआईजी, तक शि Iकायत करना पड़ा ।वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री गिरीशचंद यादव ने भी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा किया था ,तो व्यापार मंडल के अध्यक्ष इंद्रभान सिंह "इंदू " व कांग्रेस जिलाध्यक्ष फैसल हसन तबरेज़ ने आंदोलन की चेतावनी दे डाली थी।समाजसेवी अशोक सिंह ने तो बाकायदा आईजी जोन वाराणसी विजय कुमार मीणा से मिलकर तत्काल थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई करने का निवेदन किया था।लेकिन इन सबके बावजूद एसपी अशोक कुमार ने उन्हें लाइन बाजार से हटाकर मछलीशहर का नया कोतवाल जब नियुक्त किया तो एक बार फिर जनता के बीच यह चर्चा होने लगी कि न्याय इस सरकार में मिलना बहुत मुश्किल दिखाई दे रहा है।सवाल यह उठता है कि आखिर एक के बाद एक पुलिस कप्तान थानाध्यक्ष को हटा दो देते हैं फिर उनको नई तैनाती कुछ दिनों बाद क्या देख कर देते है।बात अगर चौकी इंचार्ज की भी की जाए तो उन्हें भी लाइन हाजिर करने के बाद गुपचुप तरीके से अन्य स्थानों पर तैनात कर दिया जाता है। ऐसे में प्रदेश की योगी सरकार कि भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान पर कहीं न कहीं सवाल उठना लाजमी है। 2022 के विधानसभा चुनाव होने में अब मात्र 20 महीने ही बचे हैं ऐसे में यह मुद्दा चुनावी मुद्दा अगर बनता है तो कोई बड़ी बात नहीं होगी।. पर सच्चाई तो यही है कि सत्ता शासन किसी का भी हो थानेदारी के लिए गठजोड़ बन ही जाता है (
सैय्यद हसनैन क़मर "दीपू") "ब्यूरो चीफ"
"सहारा न्यूज़ नेटवर्क "जौनपुर"
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