जौनपुर। निकाय चुनाव के तीरीख की घोषणा भले ही अभी नहीं हुई है लेकिन निर्वाचन नामावली का कार्य युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। नगर क्षेत्र के सभी बीएलओ और लेखपालों को इस कार्य के लिए लगाया गया है लेकिन इस कार्य की पारदर्शिता हमेशा की तरह इस बार भी सवालों के घेरे में है। सवाल यह है कि क्या मतदाता सूची का सही हजारों लोगों को फिर सूचि में गड़बड़ी कराने के लिए हर हथकंडे हस्ताक्षर से तो कही बीएलओ व लेखपाल की मिलीभगत से विरोधियों के समर्थकों का नाम वोटर लिस्ट से गायब कराने के लिए हर संभव कोशिश शुरू हो गई है। ऐसे में अगर मतदाताओं का नाम सूची से गायब हो जाये तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। हलांकि पिछले चुनाव में चूक खाये एक प्रत्याशी ने इस मामले को जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत उठाया और अधिकारियों के पास कोई जवाब न होने के चलते मामले में हीलाहवाली के चलते सूचना आयोग ने तहसीलदार सदर / जनसूचना अधिकारी के वेतन से पच्चीस हजार रूपये अर्थदंड के रूप में वसूली किये जाने का आदेश भी बीते 20 मई को दिया था। गौरतलब हो कि विगत चुनाव में चकप्यार अली वार्ड से सोलह सौ से अधिक मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से गायब कर दिया गया था। जिसके चलते पूर्व सभासद शाहिद मेहदी चुनाव हार गये थे
पिछले निकाय चुनाव में सही प्रकाशन होगा या कई गिरोह ने कटवाये थे अधिकारी ने यह पिछले चुनाव की तरह सूची से नाम
मताधिकार से वंचित पूर्व सभासद शाहिद मेंहदी इसके कोई रिकार्ड होना पड़ेगा। संभावित ने डीएम को पत्र देकर उम्मीदवार मतदाता फिर जताई आशंका बाद शाहिद मेंहदी द्वारा
सूचना न देने पर अपनाते देखे जा रहे हैं। तहसीलदार पर लग चुका के जन सूचना विभाग केही बीएलओ के फर्जी है पच्चीस हजार जुर्माना
जिसके बाद उन्होंने जन सूचना के तहत इस मामले का उठाया और वोटर लिस्ट से नाम हटाये जाने का कारण जिला प्रशासन से सूचना के अधिकार के तहत मांगा लेकिन इस मामले में पहले तो कई महीनों तक हीलाहवाली की गई और उसके बाद राज्य सूचना आयोग में मामला जा पहुंचा तो आनन फानन में पूछे गये प्रश्न के इतर जन सूचना कहकर पल्ला झाड़ लिया कि उनके पास मौजूद नहीं है। जिसके इसी बात का शपथ पत्र मांगा गया लेकिन जिले द्वारा मामले में फिर हीलाहवाली की जाने लगी और कई माह प्रतीक्षा के बाद शाहिद मेंहदी ने दूसरी अपील की। अपील की सुनवाई के बाद राज्य सूचना आयोग ने तहसीलदार सदर जौनपुर से दो सौ पचास रूपया प्रतिदिन की दर से कुल पच्चीस हजार रूपया वेतन से कटौती करने का जिलाधिकारी को निर्देश जारी किया। अब सवाल यह उठता है कि क्या इस बार पारदर्शिता के साथ बीएलओ और लगाये गये कर्मियो द्वारा मतदाता सूची बनाई जायेगी या एक बार फिर नाम कटवाने वाले सक्रिय गिरोहों के दबाव में हजारों लोगों को मताधिकार से वंचित होना पड़ेगा जबकि इसका अंदेशा डीएम को पत्र देकर बीजेपी नेता नेहाल हैदर व पूर्व सभासद शाहिद मेंहदी ने जता दिया है अब प्रशासन इसमें कितनी सक्रियता दिखाता है और सूची के प्रकाशन में कितनी पारदर्शिता बरती जाती है यह तो सूची के प्रकाशन के बाद ही जाहिर होगा।
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