पत्रकारिता की गरिमा बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी : अशोक सिंह
मुम्बई: लगभग 195 वर्ष पहले शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता का गौरव ऊंचा बनाए रखने के लिए हम सब को सतत प्रयत्न करना चाहिए। यह हम सब की जिम्मेदारी है ।क्योंकि प्रशासन, पब्लिक और प्रकृति के बीच संतुलन बनाने के लिए सेतु का काम करने वाली पत्रकारिता कल भी आवश्यक थी, आज भी आवश्यक है और भविष्य में भी आवश्यक रहेगी। यह कहना है उद्योगपति सामाजिक कार्यकर्ता और जौनपुर लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी अशोक सिंह का।
अशोक सिंह हिंदी पत्रकारिता दिवस पर मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि भारत की आजादी में सबसे बड़ा योगदान और प्रेरणा अगर किसी से मिली है तो वह है पत्रकारिता। अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के खिलाफ देश में आजादी की अलख जगाने वाले पत्रकार ही थे जिसकी बदौलत जन-जन में देश प्रेम की भावना पहंची और देश आजाद हुआ।
आज भी हम देखते हैं कि सत्ता की कमियों ,जनता की जरूरतों और प्रकृति के दोहन को लेकर अगर कोई आवाज उठा रहा है तो पत्रकारिता ही है। हां यह कहा जा सकता है कि पत्रकार और पत्रकारिता आधुनिक परिवेश में कहीं न कहीं दबी हुई लगती है। निडर होकर पत्रकारिता धर्म को निभाने के लिए सरकार समाज और हम सबको साझा प्रयास करना पड़ेगा।
एक सवाल के जवाब में सिंह ने बताया कि आज भी तो हम पत्रकारिता के बल पर ही शासन करना चाहते हैं ।लेकिन आज पत्रकारिता को उसके मुकाम नहीं देना चाहते जिसकी वह हकदार है। दबे कुचलेलोगों की आवाज जब कोई नहीं उठा पाता तो वह काम मीडिया करती है । और उसे करना भी है वरना समाज की विसंगतियां हमेशा एक जैसी बनी रहेगी ।आज जरूरत है एक निष्पक्ष, सकरात्मक पत्रकारिता की। अब तो पहले जैसी साधनहीनता भी नहीं है। नेट का जमाना है। हम अपनी बात चंद घंटों में पूरी दुनिया में फैला सकते हैं। लेकिन निष्पक्षता से कही हुई बात का असर ज्यादा होता है। और इस धर्म को निभाने के लिए हमें निडर होना होगा ।और मुझे उम्मीद है कि हम पत्रकारिता के उस गौरव को पुनः हासिल कर सकेंगे ।अलबत्ता सरकार के साथ-साथ सरमायादारों और राजनेताओं तथा स्वयं पत्रकार इसके लिए उद्यत हो तभी हम "उदंत मार्तंड" की बेबाक शैली को आज भी जिंदा रख सकेंगे।
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