"ध्वजारोहण के साथ-साथ स्वतंत्रता सेनानियों के संकल्पों का अनुकरण जरूरी
" मणियाहूं में अशोक सिंह ने किया जगह-जगह ध्वजारोहण। जौनपुर: 'राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस हो या स्वतंत्रता दिवस हम सबको देश के लिए जान गवाने वाले शहीदों का सम्मान तो करना ही है साथ ही साथ उनके संकल्पों से हमें सबक भी लेना चाहिए ।जब तक हम उनके विचारों का अनुकरण नहीं करेंगे तब तक केवल झंडा वंदन से राष्ट्र में नवचेतना नहीं आएगी। आज के दिन हम सब मिलकर यह शपथ लें कि भारतीय संविधान के तहत हम आपसी सद्भाव, राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने के लिए आगे आएंगे। जितने बड़े बलिदान के बाद हमें हमारा संविधान मिला है उसकी रक्षा करने के लिए हम सब एकजुट हो जाएं यही समय की मांग है।' उक्त विचार उद्योगपति, समाजसेवी और जौनपुर लोक सभा के पूर्व प्रत्याशी अशोक सिंह ने ध्वजारोहण के दौरान व्यक्त किया। उन्होंने जगह जगह अपने मैराथन ध्वजारोहण के दौरान पहले मणियाहूं स्थित चतुर्भुज पुर के अंग्रेजी प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक विनोद कुमार पांडे के साथ ध्वजारोहण किया । इस अवसर पर उन्होंने कहा यह मेरा विद्यालय है यहां मैं पैदा हुआ हूं और यहीं की मिट्टी से बढ़कर आगे आया हूं इसलिए इन राष्ट्रीय पर्वों पर मैं यहां आता रहूंगा । मुंबई के मेरे विद्यालय में बेटे को यह कार्य सौंपकर मैं अपने गृह क्षेत्र मैं हूं। इसी कड़ी में उन्होंने मड़ियाहूं स्थित रामपुर में अंग्रेजी जूनियर कॉलेज के मुख्य कर्ता-धर्ता जितेंद्र कुमार पांडे के साथ झंडा वंदन किया । फिर आगे बढ़ते हुए मड़ियाहूं के ही चितरंजन विद्यालय में प्रबंधक दिलीप कुमार जायसवाल के साथ मिलकर तिरंगा फहराया । इसके बाद जौनपुर शहर के सुर संगम क्लासेज में पंकज सिन्हा और शैली गगन के साथ ध्वजारोहण किया । इसके बाद जौनपुर के सदर अस्पताल में जाकर धर्मपुत्र बाबा अशोक श्रीवास्तव व उनकी टीम के साथ मरीजों को फल और दूध अशोक सिंह ने वितरित किया। इन तमाम अवसरों पर अशोक सिंह के साथ सत्येंद्र सिंह, प्रदीप यादव ,संजय सिंह, बृजेश सिंह उर्फ सनी सिंह, ओम प्रकाश उपाध्याय और अन्य गणमान्य उपस्थित थे । इन कार्यक्रमों के बाद शाम को मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए अशोक सिंह ने देश में चल रहे किसान आंदोलन के संदर्भ में कहा कि एक बात हमें ध्यान रखनी होगी कि किसान संशोधन बिल दोनों सदनों से पास हो चुका है। इसलिए चाह कर भी उस को बदलने में दिक्कत जरूर आएगी। हां एक बात है जो भी आंदोलन हो रहा है यह बिल पास होने से पहले होता तो ज्यादा कारगर हो सकता था । विपक्ष भी अपनी भूमिका तय करे कि किसानों के आंदोलन को हिंसक ना होने दें। आंदोलन करना सबका अधिकार है और होना भी चाहिए। लेकिन इसके लिए नाटक नहीं किया जाए ।देश के अन्नदाता किसान सड़कों से लेकर लाल किले तक बवाल करते हुए जाने के लिए मजबूर हों तो इसके लिए सरकार को भी गंभीरता से विचार करना चाहिए और विपक्ष भी इस ओर सिर्फ विरोध के लिए विरोध को हवा ना दे। यह बहुत ही दुखद है की लगभग ढाई महीने से देश के अन्नदाता किसान दिल्ली बॉर्डर पर जमा हैं। और ऐन गणतंत्र दिवस के दिन कुछ अराजक तत्वों ने आंदोलन को हिंसक बनाने का प्रयास किया जो बहुत ही शर्मनाक है।यह बंद होना चाहिए किसानों से सीधा संपर्क करके उनकी बात भी सुनी जानी चाहिए।
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