से हासिल किया मुकाम, मजदूर से मालिक बन दे रहे रोजगार

 हुनर और हौसला हो तो सभी बाधाओं को पार कर जिंदगी में मुकाम हासिल किया जा सकता है. इस बात के नजदीक जौनपुर के आरा गांव के निवासी अरविंद राजभर हैं. 15 वर्ष तक विभिन्न कंपनियों के लिए बतौर मजदूर काम करने वाले अरविंद राजभर लॉकडाउन के बाद अपने ही गांव में रोजगार दे रहे हैं.

लॉकडाउन से पहले अरविंद राजभर लुधियाना में कपड़े की कंपनी में बतौर मजदूर काम करते थे. दिन भर काम करने के बाद उन्हें 400 रुपये मिलते थे. किसी तरह से अरविंद राजभर अपने घर का खर्चा वहन कर पाते थे. लेकिन फिर भी अरविंद को अपने हुनर और हौसले पर पूरा यकीन था. लॉकडाउन के दौरान उन्होंने इतनी कड़ी मेहनत की कि उनकी तकदीर ही बदल गई. अपनी तस्वीर संवारने के लिए अरविंद राजभर आरा गांव डाउन के दौरान मास्क बनाकर उसका वितरण करना शुरू कर दिया. इस काम में उनकी सहायता जाफराबाद के भाजपा विधायक डॉ हरेन्द्र ने भी की. विधायक द्वारा इस बाबत उन्हें वित्तीय सहायता भी दी गई.

लॉकडाउन के बाद वापस दूसरे प्रदेश जाकर काम खोजने के बजाय अरविंद राजभर आरा गांव प्ले के दम पर अपने गांव में ही छोटी सी फैक्टरी स्थापित कर ली. 35 वर्षीय अरविंद राजभर आरा गांव साल के अनुभव का फायदा उठाया. फैक्ट्री लगाने के बाद उन्होंने गांव में ही तकरीबन 15 सिलाई मशीन से काम शुरू किया. फैक्ट्री स्थापित करने के लिए उन्होंने उद्योग विभाग से संपर्क किया प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से 10 लाख रुपये का ऋण लिया और गांव में ही कारोबार की शुरुआत कर दी. अरविंद राजभर के हौसले की कहानी यहीं नहीं खत्म होती है. उन्होंने विभिन्न गांव के 15 लोगों को रोजगार भी दिया. अरविंद राजभर ने रीता इंटरप्राइजेज फैक्ट्री के माध्यम से जैकेट,स्वेटर, लोअर, टीशर्ट और टोपी जैसे सामान बनाते हैं.

अरविंद राजभर का कहना है कि जहां एक तरफ पूरा विश्व आपदा में अपने हौसले हार रहा था तो उन्होंने प्रधानमंत्री की बात से आपदा को अवसर में बदलने की ठान ली. उन्हें लगा जब बाहर जाकर दूसरों के लिए काम कर सकते हैं तो खुद अपने घर में रहकर वह यह काम क्यों नहीं कर सकते. इसी सोच और हौसले के दम पर अरविंद ने गांव के ही 15 लोगों को रोजगार भी मुहैया कराया है. लॉकडाउन से पहले मजदूरी करने वाले अरविंद राजभर आपदा को अवसर में बदलकर अब मालिक हो गए हैं.